उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड एवं लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के बीच संपन्न समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत, बीएसआईपी की एक टीम ने सोनभद्र स्थित सलखन जीवाश्म उद्यान में पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक प्रमाण प्रागैतिहासिक स्ट्रोमैटोलाइट्स के वैज्ञानिक प्रलेखन हेतु दो दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन किया।
कैमूर प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) के सहयोग तथा BSIP के भू-धरोहर एवं भू-पर्यटन संवर्धन केंद्र की संयोजक डॉ. शिल्पा पांडेय के मार्गदर्शन में टीम ने चट्टानी सतहों पर संरक्षित स्ट्रोमैटोलाइट्स जो सायनोबैक्टीरिया द्वारा निर्मित परतदार संरचनाएँ हैं का विस्तृत वैज्ञानिक अभिलेखन किया।
सोनभद्र जनपद के प्राकृतिक परिदृश्य के मध्य स्थित सलखन जीवाश्म उद्यान, भारत के महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक एवं प्राकृतिक धरोहर स्थलों में से एक है। उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड ने हाल के वर्षों में लगभग 1.4 अरब वर्ष पुराने इस उद्यान के संरक्षण एवं विकास हेतु अनेक पहलें की हैं, जिनमें व्याख्यात्मक बोर्ड (interpretive signage), फेंसिंग, प्रकृति पथ, विश्राम स्थलों तथा पेयजल सुविधाओं का विकास शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ इस संवेदनशील जीवाश्म धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित करना है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड सलखन जीवाश्म उद्यान को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत है। जून 2025 में इस उद्यान को यूनेस्को की संभावित सूची (Tentative List) में प्राकृतिक धरोहर श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलित किया गया है।