उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य काशी वन्यजीव प्रभाग का हिस्सा है। इस अभयारण्य में तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चिंकारा/चीतल, लकड़बग्घा, लोमड़ी, सियार आदि वन्यजीव पाए जाते हैं। यहाँ मोर, लाल जंगल मुर्गा, बटेर, तीतर, चील, गिद्ध, जंगली मैना, तोता, कोयल, बार्न आउल (उल्लू) तथा बुलबुल जैसी अनेक रंग-बिरंगी पक्षी प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से निवास करती हैं।
यह अभयारण्य अजगर, कोबरा, क्रेट, जलसर्प, बिच्छू, मॉनिटर लिज़र्ड आदि सरीसृपों का भी आवास है। देवदारी जलप्रपात की चट्टानों की दरारों एवं किनारों में गिद्धों के समूह भी पाए जाते हैं।
यहाँ तेंदू, जामुन (ब्लूबेरी), महुआ, आंवला, पलाश, साल, नीम, सेमल आदि सहित अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयुक्त होने वाले दुर्लभ एवं महत्त्वपूर्ण औषधीय पौधे जैसे मुसली, चितावर, अश्वगंधा, चिरायता, सर्पगंधा आदि भी यहाँ उपलब्ध हैं।
वर्षा ऋतु के दौरान राजदरी, देवदरी एवं चंद्रप्रभा जलप्रपात पूर्ण वेग से प्रवाहित होते हैं और प्राकृतिक वनों से घिरे होने के कारण यह स्थल प्रमुख पर्यटन आकर्षण बन जाते हैं।
कैसे पहुँचे
वायु मार्ग द्वारा
निकटतम हवाई अड्डा वाराणसी हवाई अड्डा है, जो यहाँ से लगभग 65 किमी दूर स्थित है। वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा गंतव्य तक पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग द्वारा
निकटतम रेलवे स्टेशन पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (लगभग 50 किमी) तथा वाराणसी रेलवे स्टेशन (लगभग 67 किमी) हैं।
सड़क मार्ग द्वारा
चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य चंदौली जनपद में स्थित है। यह लखनऊ एवं नई दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ आने-जाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी बसों तथा टैक्सी सेवाओं का सुदृढ़ नेटवर्क उपलब्ध है।
आवास
- राजदरी वन विश्राम गृह (अभयारण्य परिसर के भीतर)
- दिलकुशा वन विश्राम गृह, चकिया – अभयारण्य से 18 किमी
- लतीफ शाह वन विश्राम गृह – अभयारण्य से 18 किमी
- चंद्रकांता वन विश्राम गृह, नौगढ़ – अभयारण्य से 18 किमी
- भेसोड़ा वन विश्राम गृह, भेसोड़ा – अभयारण्य से 22 किमी