सन् 1958 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया गया, क्योंकि यहाँ विलुप्तप्राय एवं दुर्लभ हिरण प्रजाति — स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) की बड़ी संख्या पाई जाती थी।
प्रारंभ में इसे सोनारीपुर अभयारण्य के नाम से जाना जाता था। बाद में वर्ष 1977 में इसे अधिसूचित कर दुधवा राष्ट्रीय उद्यान नाम दिया गया तथा वर्ष 1988 में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा प्रदान किया गया।
यह राष्ट्रीय उद्यान लगभग 490 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है तथा इसके साथ लगभग 190 वर्ग किमी का बफर क्षेत्र भी शामिल है। इसका उत्तर-पश्चिमी भाग भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है। मोहन और सुहेली नदियाँ क्रमशः इसकी उत्तरी और दक्षिणी सीमाएँ निर्धारित करती हैं।
मानसून के दौरान यह क्षेत्र 3 से 6 मीटर ऊँची ‘एलीफेंट ग्रास’ (हाथी घास) से आच्छादित हो जाता है और यह गैंडा, बाघ, तेंदुआ, हिस्पिड हेयर तथा बंगाल फ्लोरिकन जैसी अत्यंत विलुप्तप्राय वन्यजीव एवं पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। इनमें से अंतिम दो प्रजातियाँ भारत के अधिकांश क्षेत्रों से लगभग विलुप्त हो चुकी हैं, अतः उनका यहाँ पाया जाना दुधवा के सुदृढ़ एवं संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का द्योतक है।
कैसे पहुँचे
वायु मार्ग द्वारा
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान का निकटतम हवाई अड्डा लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो यहाँ से लगभग 236.8 किमी दूर है। वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा गंतव्य तक पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग द्वारा
निकटतम रेलवे स्टेशन सीतापुर जंक्शन (लगभग 134 किमी) तथा लखीमपुर जंक्शन (लगभग 85 किमी) हैं।
सड़क मार्ग द्वारा
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लखीमपुर खीरी जनपद में स्थित है। यह राज्य राजमार्ग 25 (SH-25) तथा नई दिल्ली से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ आने-जाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी बसों तथा टैक्सियों की सुदृढ़ व्यवस्था उपलब्ध है।
आवास
राष्ट्रीय उद्यान के भीतर वन विश्राम गृह उपलब्ध हैं।