‘सुरहा ताल’ का निर्माण बलिया जनपद के बांसडीह क्षेत्र के 45 गाँवों की भूमि के समेकन से हुआ, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 3432.93 हेक्टेयर है। बाद में इसका नाम बदलकर “जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य” कर दिया गया, हालांकि स्थानीय लोग आज भी इसे इसके पूर्व नाम ‘सुरहा ताल’ से ही जानते हैं। यह जलाशय बलिया नगर से लगभग 10 किमी की दूरी से प्रारंभ होकर पश्चिम में भीकमपुर गाँव तक तथा उत्तर-पूर्व में सिंगहौली तक विस्तृत है, जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा में यह दुलवारा गाँव से सीमाबद्ध है।
जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य बलिया एवं बांसडीह क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है। ‘सुरहा ताल’ से जुड़ी कथाएँ इसके ऐतिहासिक, पारंपरिक एवं धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं। इसके आसपास स्थित 45 गाँवों के लिए यह ताल आजीविका का प्रमुख स्रोत है। मत्स्य पालन के साथ-साथ यहाँ के निवासी कृषि गतिविधियों में भी संलग्न हैं। वर्षा ऋतु के दौरान लगभग 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जिससे प्राकृतिक आवास का विस्तार होता है और जैव विविधता को अनुकूल परिस्थितियाँ प्राप्त होती हैं।