वर्ष 1977 में ललितपुर से लगभग 33 किमी दूर बेतवा नदी के समीप स्थित देवगढ़ क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया। यह क्षेत्र मुख्यतः सागौन (टेक) के वृक्षों से आच्छादित है और उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित “अंतिम सागौन वन क्षेत्र” के रूप में भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यहाँ अर्जुन, तेंदू एवं गूंज के वृक्ष पाए जाते हैं, जबकि पहाड़ी ढलानों पर बाँस की प्रचुरता है।
देवगढ़ अभयारण्य के आसपास के क्षेत्रों में भेड़िया, जंगल बिल्ली, लकड़बग्घा, जंगली कुत्ता, नेवला, विभिन्न प्रकार के हिरण, खरगोश तथा नीलगाय जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। बेतवा नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए, अजगर तथा विभिन्न प्रकार की मछलियाँ भी पाई जाती हैं।
इस अभयारण्य की एक विशेषता लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में फैले 41 जैन मंदिरों का समूह है। दशावतार मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियाँ, नक्काशीदार स्तंभ एवं स्थापत्य संरचनाएँ, साथ ही 24 तीर्थंकरों, देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती की आकर्षक प्रतिमाएँ स्थित हैं।
बेतवा नदी के तट पर तथा विंध्याचल पर्वतमाला की निकटता में स्थित यह अभयारण्य समृद्ध जैव-विविधता से परिपूर्ण है। यहाँ ऊँचाई वाले स्थानों से लगभग विलुप्त हो चुके गिद्धों एवं बार्न आउल (उल्लू) के घोंसले भी देखे जा सकते हैं।
कैसे पहुँचे
वायु मार्ग द्वारा
निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो हवाई अड्डा है, जो यहाँ से लगभग 220 किमी दूर स्थित है। वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा गंतव्य तक पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग द्वारा
निकटतम रेलवे स्टेशन ललितपुर जंक्शन (लगभग 32 किमी) है।
सड़क मार्ग द्वारा
महावीर स्वामी वन्यजीव अभयारण्य ललितपुर जनपद में स्थित है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 34 तथा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ आने-जाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी बसों तथा टैक्सी सेवाओं का सुदृढ़ नेटवर्क उपलब्ध है।
आवास
- वन विभाग विश्राम गृह, देवगढ़
- उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग – टूरिस्ट बंगला, टूरिस्ट हाउस, देवगढ़
- ललितपुर जैन धर्मशाला, श्री देवगढ़ प्रबंधक दिगंबर जैन समिति, देवगढ़, ललितपुर