राज्य में ईको-पर्यटन विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से पर्यटन निदेशालय में उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड एवं वन विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह तथा उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना उपस्थित रहे।
पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन का भविष्य तेजी से नए आयाम प्राप्त कर रहा है। इस परिवर्तित परिदृश्य में समेकित पर्यटन विकास, उत्तरदायी पर्यटन तथा वन एवं पर्यावरण विभाग के साथ बेहतर समन्वय निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य को चुनौतियों पर केंद्रित होने के बजाय समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा और इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास को एकीकृत एवं भविष्य उन्मुख स्वरूप दिया जा रहा है।
वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव एवं प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण करते हुए उसे वैश्विक पर्यटन आकर्षण के रूप में स्थापित करना प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि ईको-पर्यटन न केवल स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व को भी सुदृढ़ करता है। टाइगर रिजर्व, रामसर स्थलों एवं प्रमुख आर्द्रभूमियों में चल रहे विकास कार्यों ने उत्तर प्रदेश को वन्यजीव पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई गति प्रदान की है।
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के दुधवा, पीलीभीत, अमानगढ़ एवं रानीपुर टाइगर रिजर्व के समेकित विकास के साथ-साथ नवाबगंज पक्षी अभयारण्य (उन्नाव), पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य (गोंडा), समान पक्षी अभयारण्य (मैनपुरी), समसपुर पक्षी अभयारण्य (रायबरेली), संडी पक्षी अभयारण्य (हरदोई), सरसई नावर झील (इटावा), सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य (आगरा), अपर गंगा नदी क्षेत्र (बृजघाट से नरौरा), बखीरा वन्यजीव अभयारण्य (संत कबीर नगर) तथा हैदरपुर आर्द्रभूमि (मुज़फ्फरनगर) सहित 10 रामसर स्थलों एवं अन्य आर्द्रभूमियों के विकास हेतु निर्देश दिए गए।
बरेली स्थित नगर वन तथा कन्नौज के लाख बहोसी पक्षी अभयारण्य को विशेष रूप से उन्नत स्वरूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आर्द्रभूमि आधारित पर्यटन को नई दिशा प्रदान करने के लिए पर्यटन विभाग एवं वन विभाग द्वारा “वन डिस्ट्रिक्ट, वन वेटलैंड” मॉडल के अंतर्गत एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इस पहल के तहत 52 आर्द्रभूमियों की पहचान की गई है तथा उन्हें एकीकृत पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित एवं प्रचारित करने पर सहमति बनी है।
वन विभाग द्वारा दिल्ली-एनसीआर के निकट स्थित ओखला पक्षी अभयारण्य में साइनेज स्थापित करने तथा ग्रेटर नोएडा स्थित सूरजपुर पक्षी अभयारण्य में पर्यटक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिस पर पर्यटन मंत्री ने सहमति प्रदान की।
उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा पर्यटकों के लिए एआई आधारित चैटबॉट एवं मोबाइल ऐप सुविधाएँ उपलब्ध कराने की भी तैयारी की जा रही है। बैठक के दौरान इन डिजिटल पहलों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया तथा महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
बैठक में प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति अमित अभिजात; प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) सुनील चौधरी; महानिदेशक पर्यटन एवं यूपीईटीडीबी निदेशक (प्रशासन) राजेश कुमार; प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) बी. प्रभाकर; सचिव, वन विभाग बी. चंद्रकला; अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध निदेशक, यूपी वन निगम संजय कुमार; पर्यटन सलाहकार जे. पी. सिंह सहित वन विभाग, वन निगम एवं पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।