अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस (02 फरवरी) के अवसर पर वन विभाग, पर्यटन विभाग एवं उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा महावीर स्वामी वन्यजीव अभयारण्य, देवगढ़ (ललितपुर) में 1 से 3 फरवरी 2026 तक “प्रकृति एवं पक्षी महोत्सव–2026” का आयोजन किया जा रहा है।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह, माननीय वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना, माननीय श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री श्री मनोहर लाल पंथ तथा माननीय विधायक श्री रामरतन कुशवाहा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पर्यटन एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रकृति प्रेमी, पर्यावरणविद्, पक्षी विशेषज्ञ तथा बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हुए।
यह महोत्सव बुंदेलखंड क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है। प्रकृति भ्रमण, पक्षी अवलोकन, ट्रेकिंग तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसी गतिविधियाँ बड़ी संख्या में पर्यटकों एवं प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रही हैं। सोमवार को विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए, तकनीकी सत्र आयोजित हुए तथा एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही फोटो गैलरी एवं प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर झांसी एवं ललितपुर जनपद से संबंधित लगभग ₹24 करोड़ की पर्यटन परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड का विकास सरकार की प्राथमिकता है तथा यह भव्य महोत्सव क्षेत्र के विकास की आधारशिला सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश वन जनपदों एवं वन आर्द्रभूमियों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब तक वन विभाग द्वारा 52 आर्द्रभूमियों की पहचान की जा चुकी है, जहाँ पर्यटन सुविधाओं के विकास हेतु विभिन्न विभागों के बीच आपसी सहमति बनी है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के 10 रामसर स्थलों एवं 4 टाइगर रिजर्व के आसपास पर्यटन अवसंरचना विकसित करने पर सहमति बन चुकी है।
उन्होंने आगे कहा कि “एक गंतव्य, तीन वन” की अवधारणा के अंतर्गत दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य एवं कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य को एक साथ विकसित किया जा रहा है। यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर, एक सींग वाले गैंडे, बारहसिंगा, एशियाई हाथी एवं घड़ियाल जैसे दुर्लभ वन्यजीव सहज रूप से देखे जा सकते हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना ने युवाओं से प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आर्द्रभूमियाँ न केवल जैव विविधता का आधार हैं, बल्कि जल संरक्षण एवं जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने युवाओं को वन एवं आर्द्रभूमियों से जुड़कर उनके संरक्षण एवं पुनर्जीवन में सक्रिय सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण तभी संभव है, जब युवा पीढ़ी प्रकृति से जुड़ाव स्थापित करे।