उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में स्थित शेखा झील को राज्य का 12वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया है।
सन् 1958 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया गया, क्योंकि यहाँ विलुप्तप्राय एवं दुर्लभ हिरण प्रजाति — स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) की बड़ी संख्या पाई जाती थी।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित यह अभयारण्य लगभग 203 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और शारदा नदी के तट पर स्थित है।
लगभग 263 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य विंध्याचल पर्वतमाला में स्थित है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य काशी वन्यजीव प्रभाग का हिस्सा है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में स्थित है। इसका मंडल कार्यालय बहराइच में स्थित है।
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में स्थित है।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के तीन राज्यों में फैला लगभग 5,400 वर्ग किमी क्षेत्र राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अंतर्गत आता है।
विंध्याचल क्षेत्र की वनस्पति एवं जीव-जंतुओं के संरक्षण के उद्देश्य से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1982 में मिर्जापुर जनपद के सोनभद्र क्षेत्र में की गई।
वर्ष 1977 में ललितपुर से लगभग 33 किमी दूर बेतवा नदी के समीप स्थित देवगढ़ क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया।
सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य बलरामपुर एवं श्रावस्ती जनपदों में, भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है और लगभग 452 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
वर्ष 1990 में अधिसूचित बखिरा पक्षी अभयारण्य लगभग 29 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।
समान पक्षी अभयारण्य अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में कार्य करता है।
समसपुर पक्षी अभयारण्य, रायबरेली की स्थापना वर्ष 1987 में की गई थी और यह लगभग 8 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।
हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य लगभग 2073 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य, नवाबगंज (पूर्व में नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से प्रसिद्ध), राष्ट्रीय राजमार्ग 25 (लखनऊ – कानपुर मार्ग) पर स्थित है तथा उन्नाव जनपद में आता है।
यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा वन्यजीव अभयारण्य है, जो मात्र लगभग 1 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, किंतु यहाँ 180 से अधिक पक्षी प्रजातियों के पाए जाने के कारण इसे राज्य के उत्कृष्ट अभयारण्यों में माना जाता है।
428 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत सोहागी बारवा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद में स्थित है।
80 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत लाख बहोसी पक्षी अभयारण्य ऑक्सबो झील — लाख एवं बहोसी तथा आसपास की आर्द्रभूमियों को समाहित करता है।
वर्ष 1997 में अधिसूचित पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य प्रत्येक शीत ऋतु में अनेक प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है।
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में स्थित है तथा यह ऊपरी गंगा समतल क्षेत्र में विस्तृत तराई आर्क परिदृश्य का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जनपद में स्थित ओखला पक्षी अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1990 में की गई।
सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य, जिसे प्रायः कीठम झील के नाम से जाना जाता है, वर्ष 1991 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया।
स्थानीय एवं विदेशी प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आश्रय और संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बीजा नगर झील एवं उसके आसपास के 262 हेक्टेयर क्षेत्र को वर्ष 1990 में पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित कर शिकार निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के कुंडा नगर में स्थित है।
लगभग 3,09 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत सांडी पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में हरदोई–सांडी मार्ग पर, दहर झील एवं गर्रा नदी के आसपास स्थित है।
‘सुरहा ताल’ का निर्माण बलिया जनपद के बांसडीह क्षेत्र के 45 गाँवों की भूमि के समेकन से हुआ, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 3432.93 हेक्टेयर है।