माननीय प्रधानमंत्रीभारत
माननीय मुख्यमंत्रीउत्तर प्रदेश सरकार
माननीय कैबिनेट मंत्रीपर्यटन एवं संस्कृति विभागउत्तर प्रदेश सरकार
अपर मुख्य सचिवपर्यटन एवं संस्कृति विभागउत्तर प्रदेश सरकार
महानिदेशकपर्यटन विभागउत्तर प्रदेश सरकार
निदेशक (ईको-पर्यटन)पर्यटन विभागउत्तर प्रदेश सरकार
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विश्व कृषि पर्यटन दिवस के अवसर पर पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से नेशनल उद्योग आश्रम इंटर कॉलेज, देवा रोड, मटियारी, लखनऊ के विद्यार्थियों के लिए बाराबंकी जनपद के रजौली स्थित “मधुमक्खी वाला” केंद्र का शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया गया।
युवाओं को पर्यटन एवं प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा शैक्षिक भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। इसी पहल के अंतर्गत, शनिवार, 21 फरवरी 2026 को युवा पर्यटन कार्यक्रम के तहत तथा ईज़मायट्रिप के सहयोग से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एसजीपीजीआई, लखनऊ के लगभग 60 विद्यार्थियों को शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य, उन्नाव का शैक्षिक भ्रमण कराया गया।
पर्यटकों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा एक आधुनिक मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। “यूपी ईको टूरिज्म” उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन का आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे पर्यटकों को राज्य की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर का सहज, उत्तरदायित्वपूर्ण एवं आधुनिक तरीके से अनुभव कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह ऐप निम्नलिखित सुविधाएँ प्रदान करता है:
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ईको-पर्यटन नई ऊँचाइयों को छू रहा है तथा राज्य सरकार द्वारा पर्यटकों के लिए सुविधाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड की एक बैठक लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
उत्तर प्रदेश दिवस एवं राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के उद्देश्य से 24 जनवरी 2026 को लखनऊ स्थित राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल पर युवा पर्यटन पहल के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक एवं शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को 25 जनवरी 2026 को माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह द्वारा सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय आर्द्रभूमि दिवस (02 फरवरी) के अवसर पर वन विभाग, पर्यटन विभाग एवं उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा महावीर स्वामी वन्यजीव अभयारण्य, देवगढ़ (ललितपुर) में 1 से 3 फरवरी 2026 तक “प्रकृति एवं पक्षी महोत्सव–2026” का आयोजन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव ने टाटा संस के प्रतिनिधियों के साथ अयोध्या में प्रस्तावित “मंदिर वास्तुकला संग्रहालय” परियोजना पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा की। यह संग्रहालय परियोजना टाटा संस द्वारा डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण तथा 90 वर्षों तक संचालन मॉडल के अंतर्गत विकसित की जाएगी।
राज्य में ईको-पर्यटन विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से पर्यटन निदेशालय में उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड एवं वन विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह तथा उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय वन, पर्यावरण, प्राणी उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड एवं लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के बीच संपन्न समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत, बीएसआईपी की एक टीम ने सोनभद्र स्थित सलखन जीवाश्म उद्यान में पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक प्रमाण प्रागैतिहासिक स्ट्रोमैटोलाइट्स के वैज्ञानिक प्रलेखन हेतु दो दिवसीय क्षेत्रीय अध्ययन किया।
बाल दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों के लिए विस्ताडोम ट्रेन सफारी आयोजित की गई। इसमें राजकीय इंटर जुबली कॉलेज, लखनऊ के लगभग 30 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। बोर्ड की इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों ने प्रकृति, जंगलों एवं वन्यजीवों के मध्य एक रोमांचक एवं अनूठी यात्रा का अनुभव प्राप्त किया।
प्रसिद्ध दुधवा राष्ट्रीय उद्यान तक पहुँचना अब पर्यटकों के लिए और अधिक सुगम हो गया है। उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) द्वारा लखनऊ से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के लिए एसी बस सेवा प्रारंभ की गई है। यह एसी बस सेवा 4 नवंबर 2025 से 15 दिनों के परीक्षण संचालन (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में संचालित की जा रही है।
राज्य के प्रसिद्ध ईको-पर्यटन स्थलों को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा तीन दिवसीय फैमिलराइजेशन (फैम) ट्रिप का आयोजन किया गया।
आज यूनाइटेड किंगडम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से आए फोटो पत्रकार हैदरपुर आर्द्रभूमि की समृद्ध पक्षी विविधता को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।
युवा पर्यटन क्लब के उत्साही सदस्यों ने लखनऊ के गोमती नगर स्थित जीवंत यूपी दर्शन पार्क में आयोजित रोमांचक ट्रेजर हंट गतिविधि में सहभागिता की।
लखनऊ, 17 मई 2025 – उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड (UPETDB) द्वारा “वाइल्ड वंडर्स ऑफ दुधवा” विषय पर एक विशेष फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।
लखनऊ के युवा पर्यटन क्लब के उत्साही एवं जिज्ञासु सदस्यों ने बिछिया (बहराइच) से मैलानी (लखीमपुर खीरी) तक विस्ताडोम कोच में एक अनूठी यात्रा का अनुभव प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने तराई क्षेत्र की हरियाली, प्राकृतिक सौंदर्य एवं वन्य परिवेश का आनंद लिया।
चंबल की निर्मल नदियों से लेकर दुधवा के घने जंगलों और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के शांत प्राकृतिक दृश्यों तक, यह यात्रा राज्य की समृद्ध जैव विविधता, वन्यजीवों और इको-टूरिज्म स्थलों को करीब से जानने का एक विशेष अनुभव है।
बिछिया, दुधवा और मैलानी को जोड़ने वाले विस्ताडोम कोच में सवार होकर प्रकृति के अद्भुत एवं अनुपम सौंदर्य का अनुभव करें।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान तक पर्यटन को बढ़ावा देने एवं आवागमन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने लखनऊ और दुधवा के मध्य हवाई सेवा प्रारम्भ करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य वर्तमान लगभग पाँच घंटे की यात्रा अवधि को घटाकर मात्र एक घंटे तक सीमित करना है।
उत्तर भारत का सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म प्रेमियों के लिए भी एक विशेष आकर्षण का केंद्र है। घने वनों, शांत आर्द्रभूमियों और समृद्ध वन्यजीव अभयारण्यों से परिपूर्ण यह राज्य प्रकृति के बीच एक सुखद और ताजगी भरा अनुभव प्रदान करता है।
इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट के विकास और संचालन के लिए यूपी टूरिज्म के साथ साझेदारी
यूपी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UPETDB) के साथ दुधवा नेशनल पार्क में/के पास इको रिसॉर्ट्स के लिए सहयोग प्रस्ताव
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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद में स्थित शेखा झील को राज्य का 12वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया है।
सन् 1958 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद के इस क्षेत्र को अभयारण्य घोषित किया गया, क्योंकि यहाँ विलुप्तप्राय एवं दुर्लभ हिरण प्रजाति — स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) की बड़ी संख्या पाई जाती थी।
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित यह अभयारण्य लगभग 203 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और शारदा नदी के तट पर स्थित है।
लगभग 263 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य विंध्याचल पर्वतमाला में स्थित है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में स्थित चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य काशी वन्यजीव प्रभाग का हिस्सा है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में स्थित है। इसका मंडल कार्यालय बहराइच में स्थित है।
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में स्थित है।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के तीन राज्यों में फैला लगभग 5,400 वर्ग किमी क्षेत्र राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अंतर्गत आता है।
विंध्याचल क्षेत्र की वनस्पति एवं जीव-जंतुओं के संरक्षण के उद्देश्य से कैमूर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1982 में मिर्जापुर जनपद के सोनभद्र क्षेत्र में की गई।
वर्ष 1977 में ललितपुर से लगभग 33 किमी दूर बेतवा नदी के समीप स्थित देवगढ़ क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया।
सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य बलरामपुर एवं श्रावस्ती जनपदों में, भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है और लगभग 452 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
वर्ष 1990 में अधिसूचित बखिरा पक्षी अभयारण्य लगभग 29 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।
समान पक्षी अभयारण्य अनेक प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में कार्य करता है।
समसपुर पक्षी अभयारण्य, रायबरेली की स्थापना वर्ष 1987 में की गई थी और यह लगभग 8 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।
हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य लगभग 2073 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य, नवाबगंज (पूर्व में नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से प्रसिद्ध), राष्ट्रीय राजमार्ग 25 (लखनऊ – कानपुर मार्ग) पर स्थित है तथा उन्नाव जनपद में आता है।
यह उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा वन्यजीव अभयारण्य है, जो मात्र लगभग 1 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, किंतु यहाँ 180 से अधिक पक्षी प्रजातियों के पाए जाने के कारण इसे राज्य के उत्कृष्ट अभयारण्यों में माना जाता है।
428 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत सोहागी बारवा वन्यजीव अभयारण्य उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जनपद में स्थित है।
80 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत लाख बहोसी पक्षी अभयारण्य ऑक्सबो झील — लाख एवं बहोसी तथा आसपास की आर्द्रभूमियों को समाहित करता है।
वर्ष 1997 में अधिसूचित पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य प्रत्येक शीत ऋतु में अनेक प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल है।
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में स्थित है तथा यह ऊपरी गंगा समतल क्षेत्र में विस्तृत तराई आर्क परिदृश्य का हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जनपद में स्थित ओखला पक्षी अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1990 में की गई।
सूर सरोवर पक्षी अभयारण्य, जिसे प्रायः कीठम झील के नाम से जाना जाता है, वर्ष 1991 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया।
स्थानीय एवं विदेशी प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आश्रय और संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बीजा नगर झील एवं उसके आसपास के 262 हेक्टेयर क्षेत्र को वर्ष 1990 में पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित कर शिकार निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के कुंडा नगर में स्थित है।
लगभग 3,09 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत सांडी पक्षी अभयारण्य उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में हरदोई–सांडी मार्ग पर, दहर झील एवं गर्रा नदी के आसपास स्थित है।
‘सुरहा ताल’ का निर्माण बलिया जनपद के बांसडीह क्षेत्र के 45 गाँवों की भूमि के समेकन से हुआ, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 3432.93 हेक्टेयर है।
समृद्ध संस्कृति एवं परंपराओं की धरती! अपनी अगली यात्रा के लिए प्रमुख आयोजनों को चिन्हित करें।
ग्लोबल वाइल्डलाइफ फेयर में उत्तर प्रदेश के वन एवं वन्यजीव आकर्षण का केंद्र बने
ग्लोबल मैमल बिग डे पर ओखला पक्षी विहार में आयोजित हुई ईको रन
विश्व पर्यटन दिवस, 27 सितंबर के अवसर पर उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों के लिए एक विशेष भ्रमण का आयोजन किया गया।
पर्यटकों, टूर ऑपरेटरों, संरक्षण विशेषज्ञों एवं स्थानीय समुदायों के मध्य सतत समाधान हेतु सहयोगात्मक संवाद स्थापित करना तथा ईको-पर्यटन के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देना।
उत्तर प्रदेश एवं उसके प्रमुख ईको-पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष परिचयात्मक (फैम) भ्रमण का आयोजन किया गया
6 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली में आयोजित टीओएफ टाइगर्स कार्यक्रम में दुधवा टाइगर रिज़र्व को “वाइल्डलाइफ कस्टोडियन अवार्ड 2024” से सम्मानित किया गया
त्तर प्रदेश के भूवैज्ञानिक एवं पुराजीवविज्ञान स्थलों में भू-पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु सहयोग स्थापित करना
विस्ताडोम ट्रेन एवं दुधवा के लिए सीधी उड़ानों के साथ सुगम यात्रा
सघन वनों एवं समृद्ध वन्यजीवों के मध्य बिच्छीया से मैलानी तक विस्ताडोम यात्रा का अनुभव करें।
लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पलिया हवाई पट्टी तक उड़ान सेवा प्रारंभ की गई है।
क्या आप अपनी यात्रा की योजना बनाने के लिए तैयार हैं?
शाही रसोइयों एवं सड़क किनारे मिलने वाले व्यंजनों की यात्रा
उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध एवं विविध पाक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जो इसके शाही इतिहास, सांस्कृतिक समन्वय तथा कृषि समृद्धि को दर्शाती है। वाराणसी के मसालेदार स्ट्रीट फूड से लेकर लखनऊ के शाही अवध व्यंजनों तक, प्रत्येक क्षेत्र अपने विशिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश अविस्मरणीय अनुभवों का एक समृद्ध संगम प्रस्तुत करता है, आकर्षक ग्रामीण जीवन, रोमांचक ट्रेक, शांत सफारी, जीवंत खेत-खलिहान, विशिष्ट व्यंजन, शांत हाउसबोट तथा मानसून का अद्भुत आकर्षण। यहाँ का प्रत्येक क्षण एक कहानी कहने योग्य अनुभव है, जो स्मृतियों में सदा के लिए अंकित हो जाता है।
उत्तर प्रदेश के ईको-पर्यटन स्थलों का अनुभव करें!
दुधवा, कतर्नियाघाटघाट एवं पीलीभीत की यात्रा में निहित है
आज इंस्टाग्राम पर चल रहे प्रमुख रुझान देखें!
देखें कि पर्यटक उत्तर प्रदेश से क्यों आकर्षित होते हैं
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उत्तर प्रदेश पर्यटन के साथ मेरा अनुभव अविस्मरणीय रहा। जंगल सफारी, नौका सफारी और ट्रेन सफारी से लेकर दुधवा, किशनपुर एवं कतर्नियाघाट की रोमांचक यात्रा तक, हर पल अद्भुत था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि उत्तर प्रदेश इतना प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीव विविधता से भरपूर हो सकता है। मैं सभी प्रकृति प्रेमियों को यहाँ आने की अवश्य सलाह दूँगी।
मुझे मई माह में उत्तर प्रदेश ईको-पर्यटन बोर्ड के साथ भ्रमण करने का उत्कृष्ट अवसर प्राप्त हुआ। इस यात्रा की संपूर्ण व्यवस्थाएँ अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सराहनीय थीं। यात्रा आरामदायक रही और हमें अनेक विशिष्ट स्थलों का अनुभव करने का अवसर मिला। आतिथ्य, परिवहन एवं आवास की व्यवस्थाएँ प्रशंसनीय थीं तथा टीम के प्रभावी समन्वय ने पूरे अनुभव को सहज और सुखद बनाया।
अब तक के दिन जीवन, लोगों, शोर-गुल, यातायात और रंगों की चहल-पहल से भरे हुए थे, लेकिन अगले दिन जब मैं कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य में गिरवा नदी पर एक छोटी नाव में शांत जलधारा के साथ आगे बढ़ रहा था, तब चारों ओर केवल हरियाली और सुकून था।